Tuesday, March 27, 2012

कीमत





हर शै की एक कीमत होती है
मुस्कान हो या ज़िंदगी
हर एक को
अपने अपने ढंग से
उसकी कीमत चुकानी पड़ती है

छोटी सी हंसी भी
आंसुओं के सैलाब 
को पार करके ही
लबों पर सजाई जाती है

गमों के सहरा से गुजर कर ही
एक पल की खुशी
हासिल होती है

ज़िंदगी भर हम ढूंढते हैं जिस
सुकून के पल को
उस पल की मंजिल भी
जीवन-क्षितिज की सीमा होती है






Saturday, February 11, 2012

कश्मकश


सही और गलत की कशमकश मैं उलझ कर
रह गया है हर रिश्ता
सही होते हुए भी गलत हो जाना
गलत को सही मान लेना
कभी मजबूरी है
कभी जरूरी

रिश्तों की गर्माहट
नजाकत
और सजावट
सही गलत की दायरे मैं
घूमती रहती है

इस पहेली को सुलझा पाना
सीधी सड़क पर आये
अचानक मोर जैसा है
चलते हुए कदम का
ठिठक कर रुक जाने जैसा है

फिर भी सब कोशिश करते हैं
हंसी का इनाम
तो कभी
आँसू का पैगाम
बदले मैं पा जाते हैं




Saturday, December 17, 2011

सिर्फ तुम

चाँद की हर कला में
सूरज की हर किरण में
बारिश की बरसती बूंदो में
पलकों की झिमिलाती झालर में
संगीत के हर साज़ में,
साज के हर सुर में
पहली ओस की पायल में
फूलों की हर शै में
भवरों की उस गुंजन में
होठों की हर जुंबिश में
खनकती चूड़ियों की हर खनकार में
पायल की हर रून-झुन में

बस तुम हो
तुम ही तुम हो

Thursday, October 20, 2011

सवाल


सवालों के घेरों में घिरी है ज़िंदगी
हर नया पल एक नया सवाल को जन्म देता है
हर अगला पल पिछले सवाल का जवाब ढूंढ लेता है
 ये एक चक्रव्युह है
जहां इंसान बस सवाल बन कर रह जाता है

सुबह से शाम तक बस सवाल ही सवाल
रात से सुबह तक बस
सवाल ही सवाल

प्रश्न-चिन्ह बन कर रह गई है ज़िंदगी
खुद अपने से ही सवाल पूछते हैं,

यहाँ क्यूँ हैं हम
कहाँ जायेंगे यहाँ से हम
कहाँ से आये और
किस दिशा में जाएंगे हम


क्यूँ नहीं ढूंढ लेते
कुछ सवालों के जवाब हम

कब होगा सवालों का
अंत-हीन सिलसिला



Saturday, October 8, 2011

बदलते सपने



वक़्त बदल जाता है,
सपने बदल जाते हैं,
बदलता वक़्त सपनों को
भी बदल जाता है।

मुसकुराते हुए पहले सपने,
कब आँख मूँद कर सो जाते हैं;
उन सपनों तक जाने वाले रास्ते ,
कब, तीखा मोड़ लेकर खो जाते हैं,
यह वक़्त को भी नहीं पता चलता।

उड़ते हुए पल अपने साथ,
सध्यजात औ पूर्णता की दहलीज
पर पहुंचे हुए सपने ,
पलों की पंखो पर सवार होकर,
क्षितिज बिन्दु में गुम हो जाते हैं।

उनकी जगह चुपके से
आ कर बैठ जाते  हें,
अनसोचे अनदेखे अंछुए
कोरे नकोर नवीन स्वपन,
पल की किस क्षण में,
हमसफर, हमकदम बन जाते हें,
यह वक़्त भी नहीं जानता।

क्या जानता है कोई ,
बदलती खुशियाँ बदलते गम,
सपनों के अधूरे पूरे होने के
क्षण बादल देते हैं।

शायद, यही ज़िंदगी का सच है
बदलता वक़्त सपनों की ज़िंदगी भी
बदल देता है।

Tuesday, September 13, 2011

MY MOM


Sometimes I catch myself 
Thinking, "When I phone,
I can talk of this or that!" 
Then remember, I'm alone

She was always there 
To answer my calls - 
To listen to my "small talk" 
Or when I climbed the walls.

At times, I didn't feel like talking 
And somehow, she understood - 
Didn't say she wished I'd call 
Or make me feel like I should. 


Now, I wish I would have 
More times, to show I cared - 
To say, just how important 
Were, all those times we shared. 

I could have shown my love 
So much more than I did - 
I never, did it enough 
Even when I was a kid.

Now it's too late to do or say 
All those things I wish I had - 
No way to ease the pain inside
When my heart is sad. 

She was my "anchor" to this life - 
The "rock", that I clung to - 
The place, where I could turn 
When, nowhere else would do.
Now, the ravages of time 
Have worn my "rock" away - 
And all I have to cling to 
Are memories of yesterday.



Sunday, June 5, 2011

आसमान



सूरज के ढलते ही
कभी नीले, कभी ऊदे
और कभी गुलाबी- पीले
रंगों से रंगोली
सजाता है आसमान
बादलों के झरोखों से झांकता
सुनहरी किरणों की पोटली समेटता
संध्या से आँख-मिचोली खेलता आसमान

सितारों की चादर को ओढ़ कर
रात भर चाँद से खेलता कभी गरजता
कभी चमकता और कभी समाधी लगाकर
शांत चित से प्राची की दीवारों पर
सिन्दूर बिखेरता आसमान

जिन्दगी के हर रंग से सजा मेरा आसमान
कभीं ख़ुशी और कभी आंसू से खिला
मेरा आसमान
कैसे कैसे रंग बदलता है आसमान
सुबह और शाम के खिलोनों से खेलता
जिन्दगी से भरा मेरा आसमान