Tuesday, April 23, 2013

पंछी


परों की परवाज को तोलता
नीले आकाश को पंखों से नापता
नया जीवन जीने की चाह में, पंछी,
सुनहले कल की कामना
अधीर मन में समाये
बंद पिंजरे को मुंडेर समझ बैठा

बेबस पंछी ,
सोने की जंजीर में कैद होकर
पुराने रिश्ते नाते खो कर
अपना अस्तित्व नए आज में मिलाकर
सिर झुका कर
दिन औ रात नए सपने बुनने लगा

हर पल, एक नया बंधन
अतीत की हर डोर को
काटता रहा,
हर क्षण,
एक नई डोर,कदमों को बांधने लगी।

फिर से उड़ने को आतुर पंछी
हर दिशा में एक नया
दरवाजा औ नई खिड़की
ढूंढने लगा

घायल पंख ,
बेबस तन के साथ पंछी
रोज नई उम्मीद के साथ
पिंजरे में सेंध ढूँढता रहा

मन की लगन,
तन की उमंग ने
पंछी के पंखो में नई जान दी है,

घायल पंखो के साथ
नए जोश के साथ
आज फिर पंछी ने एक
नए कल को आवाज दी है।




                     

Monday, February 11, 2013

यादें





होठों पर मुस्कान कभी,
आँखों में नमी लाती हैं यादें,
बीते लम्हों को आज में
दोबारा जिंदा कर जाती हैं यादें,

गीली रेत के निशान बन कर,


तो कभी,
पत्थर पर खिची लकीर बन कर,
जीने का सहारा बनती हैं,
तो कभी,
अशकों का जरिया बनती हैं, यादें,

पतझर की सूखी डाल में अटकी
पीली पांत सी
गुलाब-शूल सी दिल में
चुभती हैं यह यादें,

यह यादें ही हैं,
जो, हमें जिंदा रखती हैं,

यह यादें ही हैं
जो हमें जीने नहीं देती हैं।


Sunday, January 20, 2013

कब.............




सीता ने पल पल राम का साथ दिया
राम ने सीता को हर बार बनवास दिया

जनक  दुलारी ने रामानुगामिनी बन कर
खामोश सहारा बन कर
भूख-प्यास को तज कर
नित नए कांटो के शूल सहे

सीता ने राम का हर कदम विश्वास किया
राम ने सीता का हर बार अविश्वास किया

कदम कदम पर सीता को
अपमान की ज्वाला में
जलना पड़ा है,
अपने को सही साबित करने के लिए
परीक्षा की अग्नि से
गुजरना पड़ा है,

हर बार एक अहिल्या
बिना अपराध के
शापित हुई है,

हर युग में नारी यूं ही
घर और बाहर
अपमानित हुई है............

कब तक चलेगा यह सिलसिला,

कब कहेगा कोई राम,
हाँ...मैं तुम्हारा विश्वास करता हूँ,
कब सोचेगा कोई पति,
हाँ, मैं, अपनी पत्नी को सही मानता हूँ,

कब.............



Tuesday, December 4, 2012

खामोशी की एक आवाज होती है




खामोश आँखों में कैद सपने,
आँसू बन कर बह जाते हैं
किसे फुर्सत है जो
सपनों को आंसुओं से
आजाद कर दे

सिले होठों की पुकार
थिरकती हंसी का गहना पहन
खामोशी से दफन हो जाती है
किसी फुर्सत है जो
अनसुनी पुकार को
फिर से आवाज दे दे।

मेहंदी लगी हथेलियाँ  
चूड़ियों की खनक में सज कर
शांत हो जाती हैं
किसे फुर्सत है जो
सो गए हाथों को
फिर से खनकना सीखा दे।

खामोश आवाजें
सदियाँ से अनसुनी रही हैं
किसे फुर्सत है जो
बंद दरवाजों को
फिर से खोल दे।








Saturday, October 13, 2012

ज़िंदगी का सफर...........




पल पल बदलते अहसासों के साथ जीना आसान नहीं
फिर भी चलना तो है,
पाँव नंगे हो  तो क्या,
धूप में फिर भी
झुलसती सड़क से गुजरना तो है ।

अपनों की, आशाओं और उम्मीदों को पूरा करने के लिए
नवजात स्वप्न समय की गर्द में दफना दिये जाते हैं
होठों पर मुस्कान, आवाज में खनक लेकर
साथ चलते हुए कदमों का
हँसते हुए साथ देना तो है।

ज़िंदगी रोज एक नया इम्तिहान देती है,
हर पल एक नया सवाल खड़ा कर देती है,
किसी मोड पर रुकने का तो सवाल ही नहीं,
आगे जाने का भी रास्ता बंद कर देती है,                  
लेकिन,
हँसते हुए,थोड़ा रुकते हुए, नया सफर
शुरू करते हैं,,,,,,
क्यूंकी, चलना तो है ,,,,,,,
हमेशा चलना तो है.........



Saturday, September 29, 2012

ज़िंदगी के कुछ पल


 
गुजरा हुआ हर पल ,
अंजाना सा लगता है;
ज़िंदगी से भरा पैमाना जैसा ,
तो कभी
गम का कोई फसाना सा लगता है।

समय की गोद से निकल कर,
मुसकुराता हुआ एक पल ,
मुकम्मल जहां की खुशी दे जाता है ,
वहीं एक कोने से,दूसरा पल
ज़िंदगी को कड़वा मोड दे जाता है।
 
हमनशीन, हमनफ़्ज़, हमदर्द बनकर,
साथ चला तो कभी,
वक़्त की गर्द में खो गया ,
हसीन लेकिन दुखती रग बनकर।

कुछ जाने से कुछ अनजाने,
ये पल कब किसकी हैं माने।
बस आते हैं और बस जाते हैं
ज़िंदगी भर की  याद बन कर
‘कलम’ की ज़िंदगी बन कर।

Friday, August 24, 2012

ज़िंदगी .............



ज़िंदगी  की राह में...
फूलों की सेज़ ही नहीं,
काँटों का बाग भी है;
मन को सहलाने वाली,
ठंडी बयार ही नहीं ,
तन को जलाने वाली॰  
आग भी है।

इस राह में ......

क्षितिज पर मुस्काने वाला सपना ही नहीं,
हर मोड़ पर इंतज़ार करने वाला तीखा मोड़ भी है।
उम्र भर का साथ निभाने का वादा करके,
साथ झटकने वाले साथी हैं,
हमकदम बन कर हमदम बन जाएँ,
वो अंजान हमसफर भी हैं।

ज़िंदगी भर का गम देने वाले
पलों की कमी नहीं, तो
खुशियों से दामन भर दें,
जीवन के ऐसे खुशगवार पल भी हैं।

क्या कहूँ,
सम्पूर्ण होने का अहसास है,
तो कहीं, अधूरेपन की ख़लिश भी है।

शायद...... इसी का नाम
ज़िंदगी है.......