Showing posts with label ज़िंदगी. Show all posts
Showing posts with label ज़िंदगी. Show all posts

Monday, June 17, 2013

अबूझे सवाल.......



मन कुछ उदासी क्यूँ है
सब कुछ है ज़िंदगी में
फिर भी
दिल में एक प्यास सी क्यूँ है

फूलों से भरे गुलशन में
कलियों के चेहरों में
नमी सी क्यूँ है

इंद्र्धानुषी रंगो से सजी ज़िंदगी में
कुछ रंगो की
कमी क्यूँ है

लाखों सितारों से सजे आसमान में
एक चाँद ,
की कमी क्यूँ है

सोच में है यह दिल
सब कुछ पाने के बाद भी
कुछ और पाने की
ललक मन में बनी क्यूँ है

सब कुछ है ज़िंदगी में
फिर भी
दिल में एक प्यास सी क्यूँ है





Friday, May 3, 2013

पहचान



सही और गलत की पहचान हो ही नहीं सकती
क्या सही है और क्या गलत है
न तो कोई यह सोचता है
और
न ही कोई समझता है

जो हमारे लिए सही है
क्या वही दूसरे के लिए भी सही है
जो हमारे लिए गलत है
क्या वही दूसरे के लिए भी गलत है

क्या किसी के पास इतनी फुर्सत है
क्या किसी के पास इतनी समझ है

नहीं, शायद नहीं
या
शायद हाँ

क्या किसी के पास
है जवाब
क्या सबके लिए सही है
क्या सबके लिए गलत है...........