Heated discussions and debates still held relentless
The battle between the sexes ever fresh and endless
She is Easwar's one half and made of Man's back bone
Still she fights for equality, though she knows she is unique
She is like a flower, emitting the hues of love and care
Nothing is as enticing as her beauty, so sensuous and soft
Her heart is a honeyed nest of varied intense emotions
But many withers in waste as not well nurtured and nourished (this is
very sad- bala)
She is like a lamp, brightens your life if let to shine and glow
She is multi-powered, even flames as sun tireless if required
Like a candle melts and merges, if enshrined in your hearts
But never cage her in a pot to flicker, it wipes off her vitality
So similar to mother earth in patience and forbearance
Like a river impeding sorrows and imparting happiness
Serene as breeze, fierce as storm and whirly as wind
Her mind deeper than oceans and vaster than the sky
She cooks for you and hooks you with her passion
She confuses you but induces you with her thoughts
She falls in love and hails you as her prince charming
She mothers you and cheers you by her pampering
Men and Women, better not to think of them apart
If she is a poem he is the lyrics, just need to be tuned
If she is the music he is the maestro playing her well
If she is life he is her breath, together they exist
She is your 'Sakthi', be pious she keeps you poised
Beware she is 'Kaali' too; the strings are in your hands only!!!
लेखनी से निकले हुए शब्द उन पलों का अहसास है जो वक़्त की समय रेखा पर समय ही लिखवाता है...........
Tuesday, March 8, 2011
सपने
कुछ सपनों को जो पंख दिए,
वो खुले आसमान में उड़ने लगे,
बादलों की छांव मिले,
तो कभी तारों की महफिल सजी।
नरम-नरम हवा के पालनों में पलने लगे,
कोरे-कोरे ये सपने रंगों से खेलने लगे,
सुनहरी धूप की धागों से एक नया जहाँ बुनते हुए,
बिखरे-बिखरे यह सपने अपने-आप में ही सिमटने लगे।
लम्बी-लम्बी राहों पर नन्हें-नन्हें कुछ कदम,
मासूम यह सपने मंज़िल की तलाश में चल पड़े.
दीपक की लौ में सूरज की रोशनी नहीं मिली,
तो थककर यह सपने उसी लौ में जलने लगे।
वक्त आगे निकल गया, सपने पीछे छूट गए,
कुछ ठहर गए, कुछ टूट गए, कुछ खुद पर ही हंसने लगे,
ज़िन्दगी के दांव में, खुद ज़िन्दगी को हार के,
अब इन अधूरे सपनो के सौदे होने लगे।
चलते-चलते खो गये, अपनी ही धड़कन से दूर हो गए,
पीछे मुड़े तो दिखा कहानी बनके बिकता अपना ही चहरा,
फिर भी रुका नहीं सांसों और धड़कनों का यह सुस्त कारवां
क्यूंकि टिमटिमा रहा था अभी भी एक सपना सितारा बन के।
वो खुले आसमान में उड़ने लगे,
बादलों की छांव मिले,
तो कभी तारों की महफिल सजी।
नरम-नरम हवा के पालनों में पलने लगे,
कोरे-कोरे ये सपने रंगों से खेलने लगे,
सुनहरी धूप की धागों से एक नया जहाँ बुनते हुए,
बिखरे-बिखरे यह सपने अपने-आप में ही सिमटने लगे।
लम्बी-लम्बी राहों पर नन्हें-नन्हें कुछ कदम,
मासूम यह सपने मंज़िल की तलाश में चल पड़े.
दीपक की लौ में सूरज की रोशनी नहीं मिली,
तो थककर यह सपने उसी लौ में जलने लगे।
वक्त आगे निकल गया, सपने पीछे छूट गए,
कुछ ठहर गए, कुछ टूट गए, कुछ खुद पर ही हंसने लगे,
ज़िन्दगी के दांव में, खुद ज़िन्दगी को हार के,
अब इन अधूरे सपनो के सौदे होने लगे।
चलते-चलते खो गये, अपनी ही धड़कन से दूर हो गए,
पीछे मुड़े तो दिखा कहानी बनके बिकता अपना ही चहरा,
फिर भी रुका नहीं सांसों और धड़कनों का यह सुस्त कारवां
क्यूंकि टिमटिमा रहा था अभी भी एक सपना सितारा बन के।
Friday, March 4, 2011
अनंत असीम आकाश

मेरी खिड़की से झांकता आकाश
सुनहरी धूप से चमकता
कभी ओस की नमी से भीगता
सावन की बूंदों में नहाता
ए़क बच्चे की तरह ठुमकता आकाश
दीवाली की जगमगाहट में मुस्कुराता
होली के रंगों से खिलखिलाता
हर रात को सितारों की चादर ओड़ कर
सुबह के इंतज़ार में ऊंघता
रोज सूरज का स्वागत करता है आकाश
मेरी खिड़की से झांकता आकाश
सिन्दूरी सूरज से सज-धज कर
शाम के रुपहले घूँघट से निहारता
सावंला सलोना आकाश
शरारती बच्चा सा पल पल
रंग बदलता
आतुर प्रेमी जैसा
धरा को हर पल
अपनी बाँहों में भरने को उत्सुक
मेरी आँगन में उतर आया
नया निराला अनोखा
अनंत असीम आकाश
Thursday, February 10, 2011
कुछ कहना है
चलो आज फिर से कलम उठाई जाये
कुछ नया और कुछ पुराना
दर्द हो या अफसाना
कागज पर उतार लिया जाये l
बसंती हवा के साथ साथ
खिड़की से चली आयी है
खट्टे मीठे पलों की यादें ,
अपनो के साथ खुल कर हँसना
रूठना मनाना
पहरों बतियाना
बात बेबात पर
यूँ ही ठहाके लगाना
सब कहीं पीछे छूट गया l
मौसम की तरह जिनदगी ने ली अंगड़ाई है
चारो और मस्तानी रुत सी छाही है
फिजा में आज फैले हैं
नयी नवेली चाहतें और सपने
संजोये-सवारें हैं जो मिल कर हमदोनों नें
हम दोनों का ..
पल पल
रूठना मनाना
बात बेबात पर
यूँ ही शरमा जाना, इठला जाना,
आँचल में बिखरा-सिमटा सा है
अनोखा अनमोल सलोना सा प्यार
सबसे छुपा कर सबको दिखा कर
देखे सपनों का निराला संसार
पलकों पर आ अटका है
देखे अनदेखे सपनों का खुमार
कहने को है बहुत कुछ
शब्द है कम
लिखने की आदत रही नहीं
चेहरे पर लिखी इबारत पढने
लगे हैं हम
-
कुछ नया और कुछ पुराना
दर्द हो या अफसाना
कागज पर उतार लिया जाये l
बसंती हवा के साथ साथ
खिड़की से चली आयी है
खट्टे मीठे पलों की यादें ,
अपनो के साथ खुल कर हँसना
रूठना मनाना
पहरों बतियाना
बात बेबात पर
यूँ ही ठहाके लगाना
सब कहीं पीछे छूट गया l
मौसम की तरह जिनदगी ने ली अंगड़ाई है
चारो और मस्तानी रुत सी छाही है
फिजा में आज फैले हैं
नयी नवेली चाहतें और सपने
संजोये-सवारें हैं जो मिल कर हमदोनों नें
हम दोनों का ..
पल पल
रूठना मनाना
बात बेबात पर
यूँ ही शरमा जाना, इठला जाना,
आँचल में बिखरा-सिमटा सा है
अनोखा अनमोल सलोना सा प्यार
सबसे छुपा कर सबको दिखा कर
देखे सपनों का निराला संसार
पलकों पर आ अटका है
देखे अनदेखे सपनों का खुमार
कहने को है बहुत कुछ
शब्द है कम
लिखने की आदत रही नहीं
चेहरे पर लिखी इबारत पढने
लगे हैं हम
-
Sunday, September 5, 2010
नीर भरी बदली
नीर भरी बदली
नीले आकाश तले
बादलों की छाव में
कब आकर बरस गयी
नीर भरी बदली
सीने में अहसासों का भार लिये
मन में उमंगों का वार लिये
प्रियतम से मिलने को आतुर
फिर से छलक गयी
नीर भरी बदली
नैनों में सपनों का शुमार
होठों पर मिलन का खुमार
तन पर पहले प्यार की फुहार
अपने में समेटे हुए
फिर से छलक गयी
नीर भरी बदली
मेरे जीवन आकाश में
साँसों के तार में
मुस्कान के प्यार से बंधी
नव रस की वर्षा कर गयी, यह
नीर भरी बदली.........
Saturday, August 7, 2010
कुछ तो कहो,...........
कुछ नहीं कहा तुमने
लेकिन यह क्या सुना मैंने
लब खुले नहीं
होंठ हिले नहीं
बोल फिर सुनी कैसे मैंने
कुछ तो हैं मन मैं तुम्हारे
जो तुम कहना नहीं चाहते
मन में दबे हुए तूफ़ान को
बहने नहीं देना चाहते
जिन्दगी के इम्तेहां को
मिल कर सहज कर लेंगे
हालात की दुश्वारियों को
हँस कर हल कर लेंगे
चले आओ थम कर हाथ मेरा
हमसफ़र हैं हम
हर मुश्किल आसान हो जायेगी
मुस्कारो दो एक बार फिर से
मेरे दुनिया ही बदल जायेगी
लेकिन यह क्या सुना मैंने
लब खुले नहीं
होंठ हिले नहीं
बोल फिर सुनी कैसे मैंने
कुछ तो हैं मन मैं तुम्हारे
जो तुम कहना नहीं चाहते
मन में दबे हुए तूफ़ान को
बहने नहीं देना चाहते
जिन्दगी के इम्तेहां को
मिल कर सहज कर लेंगे
हालात की दुश्वारियों को
हँस कर हल कर लेंगे
चले आओ थम कर हाथ मेरा
हमसफ़र हैं हम
हर मुश्किल आसान हो जायेगी
मुस्कारो दो एक बार फिर से
मेरे दुनिया ही बदल जायेगी
Wednesday, June 16, 2010
Khamosh Muskan
Har eak muskurahat muskan nahi hotee hain
Saath chalney sey koi mushkil aassan nahi hotee hain
Ban tou jatey hain hamasafar raah main
Dushwarioi ko door karkey Saath nibhana
Dukh aur takleef kay katoin ko chun kar
Dilbar kee raah aasan karney sey hi
Sahhi pyar ki pahchan hotee hain
Haath tham kar vadey kar lena
Bahaut hi aasaan hai
Ooncchee neechi raah per chaltey hueue
Larkhratey hueue kadmoin ko sahara dena
Sahi pyar ki pahchan hai
Jindgee main kuch hasil ho janey sey
Hamesha Hamaree jeet nahi hotee
Dooriyan mita dena jindgee main kabhi kabhi
Najdekeeyoin ka doosra naam nahin hotee
Mil to jatey hain do badan bari asaanee say,
lekin phir bhi
Diloin key milney main bhi dushwariayan kam nahin hotee
Kuch kahney key leyey laboin kee jumbeesh jarroree nahin
Khamosh muskan main bhi antheen kahniyan dabee hotee hain
Saath chalney sey koi mushkil aassan nahi hotee hain
Ban tou jatey hain hamasafar raah main
Dushwarioi ko door karkey Saath nibhana
Dukh aur takleef kay katoin ko chun kar
Dilbar kee raah aasan karney sey hi
Sahhi pyar ki pahchan hotee hain
Haath tham kar vadey kar lena
Bahaut hi aasaan hai
Ooncchee neechi raah per chaltey hueue
Larkhratey hueue kadmoin ko sahara dena
Sahi pyar ki pahchan hai
Jindgee main kuch hasil ho janey sey
Hamesha Hamaree jeet nahi hotee
Dooriyan mita dena jindgee main kabhi kabhi
Najdekeeyoin ka doosra naam nahin hotee
Mil to jatey hain do badan bari asaanee say,
lekin phir bhi
Diloin key milney main bhi dushwariayan kam nahin hotee
Kuch kahney key leyey laboin kee jumbeesh jarroree nahin
Khamosh muskan main bhi antheen kahniyan dabee hotee hain
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