Tuesday, February 11, 2014

उस प्यार का अहसास


बिना कुछ कहे मन की बात समझ जाते,
अबोले शब्दों को अपने होठों से कह जाते,
हमारे आसुओं को अपनी पलकों में छुपा
हमारे गालों को प्यार से थपथपाते,
पापा हमारे सिर पर हाथ फिराते।
सर्दी की ठंडक हो या
गर्मी की तपन,
हमारी फर्माइएशों को हुकुम मानकर
पूरा ही कर लाते,
दुख के हर पल में,
चुपके से हाथ पकड़कर,
अपना सहारा दे जाते,
खुशी की घड़ियाँ हमेशा
उत्सव की तरह मानते।
कभी दोस्त बन कर,
कभी हमराज़ बन कर,
पापा ने, हमेशा मुश्किलों को
हँस कर ही सुलझाया था,
दूर हों या पास, हमने उन्हे
हमेशा अपने साथ ही पाया था।

अचानक उनका साथ छूट गया,
सर से छत का साया ही टूट गया,
प्यार को वो अनदेखा सागर,
हाथों से मानों रीत गया।
आशीर्वाद उनका आज भी
बस साथ है
जिंदगी भर जो दिया उन्होने,
उस प्यार का अहसास है,
बस उस प्यार का अहसास है...........




Thursday, November 28, 2013

एक ख्वाइश



कुछ कहने सुनने के पल
बहुत कम हैं,
नजरों के इशारे समझा करो

ज़ुबान  हमेशा
हाले दिल बयां
नहीं करती
पलकों की जुंबिश देखा करो

लहराते गेसूओं की खनक
जज़्बा ए दिल
सुनाती है
खामोशी की आवाज सुना करो

चेहरे की मुस्कान
एक धोखा है
कलम की पुकार सुना करो।


Thursday, September 19, 2013

इंतज़ार




सभी के सीने में दर्द छुपा है
कहीं कम तो कहीं ज्यादा

सभी के लबों पर घायल मुस्कान है
सभी कहीं न कहीं वक़्त के मुलाज़िम हैं
हर कोई किसी न किसी पल मरता है
हंसी के पर्दे में अश्क छुपाता है
कहीं कम तो कहीं ज्यादा

उम्र के हर दौर में,
भागते दौड़ते पलों के साथ
अपने के साथ अपनों को
ढूंढने की कोशिश सबकी जारी है
कहीं कम तो कहीं ज्यादा



इंतज़ार ए पल की
तलाश पूरी होगी कभी
मिल ही जाता है धरती से
आसमान यूं ही, कभी कभी
कहीं कम तो कहीं ज्यादा



Tuesday, September 10, 2013

एक कोशिश..........




खो गए चेहरों को ढूँढने के लिये
धुंधली पड़ी आवाजों की
परतों पर से
की धूल हटाने के लिये
चलो एक कोशिश और करें

राह में चलते चलते
खो गए राहगीर जो
उन्हे फिर से एक
आवाज देने की कोशिश और करें

जुगनू से टिमटिमाते सपने
बनते बनते रेत की
लिखावट सी, मिट गए जो उन्हे,
चलो आज फिर से
सजाने की कोशिश और करें।

दुनिया की भीड़ में खो गए
जो रिश्ते नाते,
उलझ कर कहीं गुम न हो जाएँ
उन्हे फिर से सुलझा कर
मना लाने की एक कोशिश और करें।




Friday, September 6, 2013

प्रश्न चिन्ह


सवालों के घेरे में बंधी ज़िंदगी
खुद एक सवाल हो जाती है



जवाबों के जंगल में घूमते हुए
हर मोड पर एक नया सवाल
सामने खड़ा दिखाई देता है

कभी कोई पुराना सवाल
नया रूप-ओ-रंग में
फिर जनम लेता है;
वहीं सुलझा कोई सवाल
फिर नई उलझन बन कर
हँसता दिखाई देता है।

सवाल का जवाब्,
जवाब का एक नया सवाल,
सवाल जवाब का रिश्ता
ज़िंदगी से सांस जैसा है

ज़िंदगी इनही जवाबों
के सवालों में सिमट सी जाती है,
और कभी
सवालों के घेरे में बंधी ज़िंदगी
खुद एक सवाल हो जाती है



Thursday, August 29, 2013

अधूरे सवाल.............



हर रिश्ते को अपनाता मन
कब कोई बहुत अकेला हो जाता है
क्या जानता है कोई,

दुनिया की भीड़ में
रिश्तों के मेले में
हंसी का मुखौटा पहने
कब कहीं  
खामोशी का गहना पहना है किसी ने,
क्या जानता है कोई,

हर उलझन, हर सवाल का
जवाब देते हुए,
हर मोड की सलवटों को
दूर करते हुए
कब कैसे
अपने में ही उलझ गया कोई
क्या जानता है कोई







Tuesday, August 6, 2013

अनूठे सवाल


कलियों के चेहरे
किस लिए खिले खिले रहते हैं
किस लिए गर्दन में खम
लिए नयन मूँदे रहते हैं।

क्यूँ शबनमी होठों से
मुस्कान के मोती झरते हैं,
किसके आने की आहट से ही,
गेसू सँवर जाते हैं,

अध्मुंदे नयन,पलक
बिछोने बिछा कर
सोते हुए भी जगे
जगे से रहते है



गुंचो के शहर में
यह शोर मचा है,
जमाना ज़ाहिर हैं ये बातें,
एक गुल ही हैं,
जो हर खयाल से
गाफिल से रहते हैं।